महान स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का शहीद दिवस, पढ़ें उनके बारे में

हर साल चंद्रशेखर आजाद शहीद दिवस 27 फरवरी को मनाया जाता है। वे एक महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, लेखक और विचारक थे। चंद्रशेखर आजाद एक क्रांतिकारी थे और उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा गांव में हुआ था। आज उनका जन्मस्थान अब ‘आजादनगर’ के रूप में जाना जाता है। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी और माता का नाम जगदानी देवी था। चंद्रशेखर आजाद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भाबरा में पूरी की। इसके बाद वे संस्कृत का अध्ययन करने के लिए वाराणसी गए। उन्होंने वहां कानून भंग आंदोलन में योगदान दिया।

चंद्रशेखर आजाद सन् 1920-21 में गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। जब गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए, तब उन्होंने अपना नाम ‘आजाद’, पिता का नाम ‘स्वतंत्रता’ और ‘जेल’ को उनका निवास बताया। जब उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई। हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, ‘वंदे मातरम्‌’ और ‘महात्मा गांधी की जय’ का स्वर बुलंद किया। इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाए।

जब क्रांतिकारी आंदोलन उग्र हुआ, तब आजाद उस तरफ खिंचे और ‘हिन्दुस्तान सोशलिस्ट आर्मी’ से जुड़े। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक रहे आजाद हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। उन्होंने रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में 1925 में काकोरी षड्यंत्र में सक्रिय भाग लिया तथा पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार हो गए।

17 दिसंबर, 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेर लिया और जब जे.पी. साण्डर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकले तब उन पर गोली दाग दी, जो साण्डर्स के माथे पर ली और वह मोटरसाइकिल से नीचे गिर पड़ा। फिर भगत सिंह ने आगे बढ़कर 4-6 गोलियां दाग कर उसे बिल्कुल ठंडा कर दिया। जब साण्डर्स के अंगरक्षक ने उनका पीछा किया, तो आजाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया। इतना करने के बाद भी उन्होंने लाहौर में जगह-जगह पर परचे चिपकाए, जिन पर लिखा था- लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला ले लिया गया है। उनके इस कदम को भारतीय क्रांतिकारियों खूब सराहा गया।

चंद्रशेखर आजाद ने अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में सन् 1931 में रूस की बोल्शेविक क्रांति की तर्ज पर समाजवादी क्रांति का आह्वान किया और यह संकल्प किया कि वे न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी और इसी संकल्प को पूर्ण करने के लिए 27 फरवरी, 1931 को इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में अंग्रेजों से मुठभेड़ के दौरान उन्होंने खुद को गोली मारी और देश के लिए शहीद हो गए और अपनी मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी।

आजाद एक कट्टर देशभक्त थे। उन्होंने भारत की स्वतंत्रता के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया। उनके विचारों को आज भी प्रासंगिक माना जाता है। उन्होंने ‘आजाद’ रहने की अपनी प्रतिज्ञा को पूरा किया और कभी भी अंग्रेजों के हाथों नहीं आए।

चंद्रशेखर आजाद ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं:- उन्होंने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की।- उन्होंने काकोरी कांड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आज, 27 फरवरी को हम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नायक चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। चंद्रशेखर आजाद का जीवन देश की स्वतंत्रता के लिए समर्पित था, और उनका संघर्ष युवाओं के लिए आज भी एक प्रेरणा का स्रोत है।

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