जवान लड़के-लड़कियों को प्यार करने की आजादी होनी चाहिए, अदालत ने रिलेशनशिप पर किया युवाओं को सपोर्ट

 जवान लड़के-लड़कियों को प्यार करने की आजादी होनी चाहिए, अदालत ने रिलेशनशिप पर किया युवाओं को सपोर्ट
हाल ही में दिल्ली हाई कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई में इस बात का स्पोर्ट किया कि युवाओं को प्यार करने की आजादी होनी चाहिए. जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों के बीच सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों को भी अपराध माना जाता है और इसको POCSO अधिनियम के तहत जुर्म माना जाता है. इसी बात पर जज ने राय दी कि इस यंग उम्र में लड़के-लड़कियों के बीच प्यार को स्वीकार करने के लिए कानून को विकसित होना चाहिए.

हाल ही में वैलेंटाइन वीक गुजरा है. इस वीक में जहां शादी शुदा जोड़े, अडल्ट कपल आपको फूलों की दुकान, रेस्टोरेंट और गिफ्ट शॉप समेत कई जगह दिखे होंगे, वहीं इस दौरान आपको युवा लड़के-लड़कियां भी जरूर नजर आए होंगे. जिनकी उम्र 18 साल से कम होगी, लेकिन प्यार की भावना के साथ यह भी फूल खरीद रहे होंगे. दिल्ली हाईकोर्ट ने अब इन्हीं युवाओं को प्यार करने की आजादी देने की वकालत की है.

शायद खबर की हेडिंग पढ़ कर आप भी चौंक गए होंगे. दोबारा पढ़ कर हो सकता है आपने कन्फर्म किया हो कि सही पढ़ा है या नहीं, लेकिन आप ने सही पढ़ा है. दिल्ली हाई कोर्ट ने हाल ही में कहा कि 18 साल से कम उम्र के युवाओं को वैधानिक बलात्कार कानूनों के डर के बिना रोमांटिक और सहमति से बने संबंधों में शामिल होने की आजादी होनी चाहिए. वैधानिक बलात्कार कानून के तहत अगर रिश्ते में कोई भी व्यक्ति 18 साल से कम है तो इस रिश्ते को अपराध माना जाता है.

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

जस्टिस जसमीत सिंह की बेंच ने इस मामले पर बात करते हुए कहा कि किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों के बीच सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों को भी अपराध माना जाता है और इसको POCSO अधिनियम के तहत जुर्म माना जाता है. इसी बात पर जज ने राय दी कि इस यंग उम्र में लड़के-लड़कियों के बीच प्यार को स्वीकार करने के लिए कानून को विकसित होना चाहिए.

Related post